Sunday, January 23, 2011

नमस्ते !

नमस्ते !

कहते हैं कि कुछ अच्छा करने से पहले ज्यादा सोचना नहीं चाहिए, बस उसकी शुरुआत कर देनी चाहिए | इसी बात से प्रेरित होकर आज मैं अपनी मातृभाषा हिंदी में अपना ब्लॉग "मार्गदर्शन" प्रारंभ करने जा रहा हूँ | यहाँ मेरे ब्लॉग के नाम से यह कतई मतलब नहीं है कि मैं यहाँ किसी को मार्गदर्शन देने-दिखाने जा रहा हूँ या बड़ी-बड़ी बातें करने जा रहा हूँ , बल्कि इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य जीवन के उन मूल तथ्यों एवं  उद्देश्यों को ढूँढने और अमल में लाने भर का  है जिन्हें अपने भागमभाग दौड़ में हम भूलते चले जा रहें हैं | उन छोटी-छोटी बातों से अवगत करने-कराने भर का है जिनमें हमारे जीवन कि सारी खुशियाँ समाहित है |  और उन उसूलों और जिम्मेदारियों को समझना भी है जो की तब से है जब से मनुष्य की प्रजाति इस धरती पर है और जो हमें समाज में रहना सिखाती है, हमें सामाजिक बनाती है |

हमें  अपने समाज को क्या देना चाहिए यह हम पर निर्भर करता है| हमें उसे सवारना है या उसे बिगाड़ना है  यह भी हमें ही तय करना पड़ता है | आगे आनेवाली पीढ़ी क्या सीखेगी, क्या समझेगी, किस मार्ग पर चलेगी इसकी जिम्मेदारी भी हम पर ही है | अतः हम यह कह सकते है कि हम सब आने वाली पीढ़ी के मार्गदर्शक हैं |और एक अच्छा मार्गदर्शक वही है जो अपने कार्य से, अपने विचार से, अपने वैव्हार से समाज को और उस समाज में रहने वाले हर एक को सुनियोजित करे एवं समृद्धि कि ओर अग्रसर करे |

हमें यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि हमारी छोटी-से-छोटी बात, छोटे-से-छोटा कार्य भी हमारे समाज को प्रभावित करता है | अतः हमारा छोटे-से-छोटा योगदान भी हमारे समाज को बुलंदियों तक पहुंचा सकता है | इसलिए कहता हूँ कि ज्यादा सोचिये नहीं, न ही ज्यादा संकोच करें और अपना जीवन समाप्त होने से पहले एक पहल कीजिये कि आपको इस समाज में बहुत छोटा ही सही मगर योगदान करना है और इसी बात पर कुछ-न-कुछ अच्छा करते रहिये कि अपने आनेवाली पीढ़ी के आप पथप्रदर्शक एवं मार्गदर्शक बन जाएँ |

आज  २३-जनवरी को हमारे भारत देश के देशभक्त पुत्र एवं महान मार्गदर्शक "नेताजी" सुभाषचन्द्र बोस जी की जयंती है | हमें उन्हें करीब से जानने की उपलब्धि तो प्राप्त नहीं हुई पर किताबों से उनकी जीवनी पढकर ही हम इतने प्रभावित हैं कि जब किसी चौक-चौराहे पर उनका आदमकद मूरत दिखता है, अनायास मुख से निकल पड़ता है कि -" हो न हो अपने हाथ से धर्म एवं मानवता के मार्ग कि ओर संकेत देनेवाले यही अपने मार्गदर्शक हैं |" अतः आज से अच्छा दिन इस ब्लॉग को प्रारंभ करने का हो ही नहीं सकता था  |
 

आगे  कि बातें बाद में होती रहेंगी, अभी के लिए विदा एवं शुभरात्रि |





No comments:

Post a Comment