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| अण्णा हजारे |
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं!
ढह रहा इस आंदोलन में भ्रष्ट सरकारी बिसात है,
उलटी पड़ती सरकार की चालें, उलटी पड़ती बात है.
शोक में डूबे सारे भ्रष्ट उनके प्रतिकूल हालात हैं,
फूट रहा जनमत का गुस्सा क्या धर्म क्या जात है.
न देख रहे यह दिन न शाम न देख रहा कोई रात है,
मशाल लिए खड़े आज भारत के लाखों- करोड़ों हाथ है.
वर्षों लगते आघातों के यह उभरते जज़्बात हैं.
शुरू कर दो अब उलटी गिनती भ्रष्टाचार के पुतलों,
तैयार हो जाओ खाने को जो पड़नी तुमको लात है.
पर सरकार नहीं समझेगी इसलिए....
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं!
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं!
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------------------विश्वजीत

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