मार्गदर्शन
Monday, October 5, 2015
Wednesday, September 14, 2011
हिंदी और हिन्दुस्तानी....
अगर कोई कहे कि कोयल को हम कैसे पहचान सकते हैं तो अनायास ही मुख से निकल पड़ता है -"कायल की कूक-कूक की बोली से". अगर कोई किसी कोटर में ची-ची कर रहा हो तो हम अनुमान लगा लेते हैं कि हो-न-हो यह छोटी सी नन्ही सी चिड़िया "गोरैया" ही होगी. जिस तरह किसी जंगल या चिड़ियाघर में दहाड़ सुनकर मन में शेर या बाघ उभर कर सामने आ जाता है. ऐसे ही न जाने कितने ही उदाहरण होंगे जिसमे किसी जीव या व्यक्ति की पहचान उसके अपने भाषा से होती है. यहाँ भाषा का तात्पर्य देश की भाषा से है, एक ऐसी भाषा जिससे देश की पहचान जुड़ी हुई हो. जहाँ के किसी व्यक्ति की बात सुनने से ही पता चल जाये की वह किस देश का है, चाहे उसकी छवि हमारे सामने हो या न हो. आप किसी का मुख्पटल देख कर यह कह सकते हैं की वह किस देश का हो सकता है ? अनुमान भर लगा सकते हैं..... पर यदि आपको भाषा का ज्ञान हो, तो आप बिना किसी अनुमान से यह कह सकते हैं कि जो व्यक्ति बात कर रहा है वह किस देश का हो सकता है. भाषा किसी भी देशवासी के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहचान है.
आज "१४ सितम्बर" हिंदी दिवस है....
....."शेष भाग बाद में"
आज "१४ सितम्बर" हिंदी दिवस है....
....."शेष भाग बाद में"
Thursday, August 25, 2011
हाथों में मशाल लिए समक्ष आ रहा प्रतिकार है
महंगाई, गरीबी और भ्रष्टाचार से त्रस्त
हम भारत के जानता कर रहे चीत्कार हैं.
सर पे बिठाया जिनको सरकार बनाया जिनको
सुनने को हमारी पीड़ा आज वे क्यों नहीं तैयार हैं?
हम भारत के जानता कर रहे चीत्कार हैं.
सर पे बिठाया जिनको सरकार बनाया जिनको
सुनने को हमारी पीड़ा आज वे क्यों नहीं तैयार हैं?
देखो कैसे देश के लिए एक देशभक्त अण्णा
पिछले दस दिनों से अनसन कर हो रहे बीमार हैं.
और दूसरी तरफ जानता के पैसों से कहीं पर
सरकार के नुमाईंदे मना रहे जश्न-ए-इफ़्तार हैं.
पिछले दस दिनों से अनसन कर हो रहे बीमार हैं.
और दूसरी तरफ जानता के पैसों से कहीं पर
सरकार के नुमाईंदे मना रहे जश्न-ए-इफ़्तार हैं.
दलीलें देकर विधेयकों का पुलिंदा बांधती है यह सरकार
ज़रा बताये कितनों का आज तक किया जनोद्धार है.
यह नेता संसद में पैसा खाकर, संसद को सर्वोच्च बताकर
संविधान की आड़ में करती जानता का बलात्कार है.
मुर्ख हैं वे नेता जो आज कह रहे जनता से
अन्ना-आंदोलन एक असंवेधानिक दुराचार है.
है कोई जवाब, जानता के करोड़ों रुपयों से चलती
लोकसभा आज सिर्फ एक आम मछली बाजार है.
2जी में राजा, कैश फॉर वोट में सिंह, चारा खाने में यादव,
एयर-इंडिया को डुबोया पटेल ने, कृषि घोटाले में पवार है.
अरे जो करते हैं संसद में खरीद-बिक्री-व्यापार
ऐसे लोगों की क्या आज हमें और इस देश को दरकार है?
जिन्होंने गरीबी देखी नहीं, जिन्होंने भुख कभी सहा नहीं
कैसे बनायेंगे सशक्त विधेयक वे उनका क्या आधार है?
जन के लिए कुछ करते नहीं, जन की भावना समझते नहीं
कैसे उम्मीद करें इनसे कि सुनेगें हम जनों का जो विचार है.
ज़रा बताये कितनों का आज तक किया जनोद्धार है.
यह नेता संसद में पैसा खाकर, संसद को सर्वोच्च बताकर
संविधान की आड़ में करती जानता का बलात्कार है.
मुर्ख हैं वे नेता जो आज कह रहे जनता से
अन्ना-आंदोलन एक असंवेधानिक दुराचार है.
है कोई जवाब, जानता के करोड़ों रुपयों से चलती
लोकसभा आज सिर्फ एक आम मछली बाजार है.
2जी में राजा, कैश फॉर वोट में सिंह, चारा खाने में यादव,
एयर-इंडिया को डुबोया पटेल ने, कृषि घोटाले में पवार है.
अरे जो करते हैं संसद में खरीद-बिक्री-व्यापार
ऐसे लोगों की क्या आज हमें और इस देश को दरकार है?
जिन्होंने गरीबी देखी नहीं, जिन्होंने भुख कभी सहा नहीं
कैसे बनायेंगे सशक्त विधेयक वे उनका क्या आधार है?
जन के लिए कुछ करते नहीं, जन की भावना समझते नहीं
कैसे उम्मीद करें इनसे कि सुनेगें हम जनों का जो विचार है.
अंत में जब बचता नहीं कुछ आम जानता के हाथ में
उठती तब हुंकार किसी की, बदलता तब व्यवहार है.
समय सिमित है अभी संभल जाएँ वे सुन के जन-जन गाँधीवाणी
वरना हाथों में मशाल लिए समक्ष आ रहा प्रतिकार है...
हाथों में मशाल लिए समक्ष आ रहा प्रतिकार है............
उठती तब हुंकार किसी की, बदलता तब व्यवहार है.
समय सिमित है अभी संभल जाएँ वे सुन के जन-जन गाँधीवाणी
वरना हाथों में मशाल लिए समक्ष आ रहा प्रतिकार है...
हाथों में मशाल लिए समक्ष आ रहा प्रतिकार है............
---------------xxx------------------
-------विश्वजीत
Tuesday, August 23, 2011
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं !!!
![]() |
| अण्णा हजारे |
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं!
ढह रहा इस आंदोलन में भ्रष्ट सरकारी बिसात है,
उलटी पड़ती सरकार की चालें, उलटी पड़ती बात है.
शोक में डूबे सारे भ्रष्ट उनके प्रतिकूल हालात हैं,
फूट रहा जनमत का गुस्सा क्या धर्म क्या जात है.
न देख रहे यह दिन न शाम न देख रहा कोई रात है,
मशाल लिए खड़े आज भारत के लाखों- करोड़ों हाथ है.
वर्षों लगते आघातों के यह उभरते जज़्बात हैं.
शुरू कर दो अब उलटी गिनती भ्रष्टाचार के पुतलों,
तैयार हो जाओ खाने को जो पड़नी तुमको लात है.
पर सरकार नहीं समझेगी इसलिए....
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं!
अण्णा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं!
---x---
------------------विश्वजीत
Sunday, January 23, 2011
नमस्ते !
नमस्ते !
कहते हैं कि कुछ अच्छा करने से पहले ज्यादा सोचना नहीं चाहिए, बस उसकी शुरुआत कर देनी चाहिए | इसी बात से प्रेरित होकर आज मैं अपनी मातृभाषा हिंदी में अपना ब्लॉग "मार्गदर्शन" प्रारंभ करने जा रहा हूँ | यहाँ मेरे ब्लॉग के नाम से यह कतई मतलब नहीं है कि मैं यहाँ किसी को मार्गदर्शन देने-दिखाने जा रहा हूँ या बड़ी-बड़ी बातें करने जा रहा हूँ , बल्कि इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य जीवन के उन मूल तथ्यों एवं उद्देश्यों को ढूँढने और अमल में लाने भर का है जिन्हें अपने भागमभाग दौड़ में हम भूलते चले जा रहें हैं | उन छोटी-छोटी बातों से अवगत करने-कराने भर का है जिनमें हमारे जीवन कि सारी खुशियाँ समाहित है | और उन उसूलों और जिम्मेदारियों को समझना भी है जो की तब से है जब से मनुष्य की प्रजाति इस धरती पर है और जो हमें समाज में रहना सिखाती है, हमें सामाजिक बनाती है |
हमें अपने समाज को क्या देना चाहिए यह हम पर निर्भर करता है| हमें उसे सवारना है या उसे बिगाड़ना है यह भी हमें ही तय करना पड़ता है | आगे आनेवाली पीढ़ी क्या सीखेगी, क्या समझेगी, किस मार्ग पर चलेगी इसकी जिम्मेदारी भी हम पर ही है | अतः हम यह कह सकते है कि हम सब आने वाली पीढ़ी के मार्गदर्शक हैं |और एक अच्छा मार्गदर्शक वही है जो अपने कार्य से, अपने विचार से, अपने वैव्हार से समाज को और उस समाज में रहने वाले हर एक को सुनियोजित करे एवं समृद्धि कि ओर अग्रसर करे |
हमें यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि हमारी छोटी-से-छोटी बात, छोटे-से-छोटा कार्य भी हमारे समाज को प्रभावित करता है | अतः हमारा छोटे-से-छोटा योगदान भी हमारे समाज को बुलंदियों तक पहुंचा सकता है | इसलिए कहता हूँ कि ज्यादा सोचिये नहीं, न ही ज्यादा संकोच करें और अपना जीवन समाप्त होने से पहले एक पहल कीजिये कि आपको इस समाज में बहुत छोटा ही सही मगर योगदान करना है और इसी बात पर कुछ-न-कुछ अच्छा करते रहिये कि अपने आनेवाली पीढ़ी के आप पथप्रदर्शक एवं मार्गदर्शक बन जाएँ |
आज २३-जनवरी को हमारे भारत देश के देशभक्त पुत्र एवं महान मार्गदर्शक "नेताजी" सुभाषचन्द्र बोस जी की जयंती है | हमें उन्हें करीब से जानने की उपलब्धि तो प्राप्त नहीं हुई पर किताबों से उनकी जीवनी पढकर ही हम इतने प्रभावित हैं कि जब किसी चौक-चौराहे पर उनका आदमकद मूरत दिखता है, अनायास मुख से निकल पड़ता है कि -" हो न हो अपने हाथ से धर्म एवं मानवता के मार्ग कि ओर संकेत देनेवाले यही अपने मार्गदर्शक हैं |" अतः आज से अच्छा दिन इस ब्लॉग को प्रारंभ करने का हो ही नहीं सकता था |
आगे कि बातें बाद में होती रहेंगी, अभी के लिए विदा एवं शुभरात्रि |
कहते हैं कि कुछ अच्छा करने से पहले ज्यादा सोचना नहीं चाहिए, बस उसकी शुरुआत कर देनी चाहिए | इसी बात से प्रेरित होकर आज मैं अपनी मातृभाषा हिंदी में अपना ब्लॉग "मार्गदर्शन" प्रारंभ करने जा रहा हूँ | यहाँ मेरे ब्लॉग के नाम से यह कतई मतलब नहीं है कि मैं यहाँ किसी को मार्गदर्शन देने-दिखाने जा रहा हूँ या बड़ी-बड़ी बातें करने जा रहा हूँ , बल्कि इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य जीवन के उन मूल तथ्यों एवं उद्देश्यों को ढूँढने और अमल में लाने भर का है जिन्हें अपने भागमभाग दौड़ में हम भूलते चले जा रहें हैं | उन छोटी-छोटी बातों से अवगत करने-कराने भर का है जिनमें हमारे जीवन कि सारी खुशियाँ समाहित है | और उन उसूलों और जिम्मेदारियों को समझना भी है जो की तब से है जब से मनुष्य की प्रजाति इस धरती पर है और जो हमें समाज में रहना सिखाती है, हमें सामाजिक बनाती है |
हमें अपने समाज को क्या देना चाहिए यह हम पर निर्भर करता है| हमें उसे सवारना है या उसे बिगाड़ना है यह भी हमें ही तय करना पड़ता है | आगे आनेवाली पीढ़ी क्या सीखेगी, क्या समझेगी, किस मार्ग पर चलेगी इसकी जिम्मेदारी भी हम पर ही है | अतः हम यह कह सकते है कि हम सब आने वाली पीढ़ी के मार्गदर्शक हैं |और एक अच्छा मार्गदर्शक वही है जो अपने कार्य से, अपने विचार से, अपने वैव्हार से समाज को और उस समाज में रहने वाले हर एक को सुनियोजित करे एवं समृद्धि कि ओर अग्रसर करे |
हमें यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि हमारी छोटी-से-छोटी बात, छोटे-से-छोटा कार्य भी हमारे समाज को प्रभावित करता है | अतः हमारा छोटे-से-छोटा योगदान भी हमारे समाज को बुलंदियों तक पहुंचा सकता है | इसलिए कहता हूँ कि ज्यादा सोचिये नहीं, न ही ज्यादा संकोच करें और अपना जीवन समाप्त होने से पहले एक पहल कीजिये कि आपको इस समाज में बहुत छोटा ही सही मगर योगदान करना है और इसी बात पर कुछ-न-कुछ अच्छा करते रहिये कि अपने आनेवाली पीढ़ी के आप पथप्रदर्शक एवं मार्गदर्शक बन जाएँ |
आज २३-जनवरी को हमारे भारत देश के देशभक्त पुत्र एवं महान मार्गदर्शक "नेताजी" सुभाषचन्द्र बोस जी की जयंती है | हमें उन्हें करीब से जानने की उपलब्धि तो प्राप्त नहीं हुई पर किताबों से उनकी जीवनी पढकर ही हम इतने प्रभावित हैं कि जब किसी चौक-चौराहे पर उनका आदमकद मूरत दिखता है, अनायास मुख से निकल पड़ता है कि -" हो न हो अपने हाथ से धर्म एवं मानवता के मार्ग कि ओर संकेत देनेवाले यही अपने मार्गदर्शक हैं |" अतः आज से अच्छा दिन इस ब्लॉग को प्रारंभ करने का हो ही नहीं सकता था |
आगे कि बातें बाद में होती रहेंगी, अभी के लिए विदा एवं शुभरात्रि |
Subscribe to:
Posts (Atom)

